ऐसे 5 खास लोगों के दीपक में फूल बनता है, ईश्वर देते हैं खास संकेत

जिनका हृदय बहुत कोमल होता है। जिन्हें प्रकृति से प्यार होता है। जो दूसरों के दुख को समझते हैं। जिनके आंखों में जल्द ही आंसू आ जाते हैं, जो जल्दी भावुक हो जाते हैं। जिनके अंदर भावनाएं बहुत होती है। ऐसे लोगों के दीपक में भी फूल बनता है। 

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दीपक में फूल बनता क्यों है?
दीपक में फूल बनता क्यों है?

जब हम भगवान की पूजा करते हैं और नित्य पूजा करते हैं तो हमें भगवान के बहुत सारे संकेत प्राप्त होते हैं। कुछ संकेतों को हम समझ जाते हैं। कुछ संकेतों को हम नहीं समझ पाते। आज बात करेंगे कुछ ऐसे व्यक्तियों के बारे में, जिनके कारण दीपक में फूल बनता है। कई लोग ऐसे हैं जिनके दीपक में रोज फूल बनता है। ऐसे ही 5 खास लोगों के बारे में जानेंगे जिनके दीपक में अक्सर फूल बनता है।

इन 5 लोगों के दीपक में बनता है फूल

1. जो व्यक्ति बहुत दिनों से पूजा कर रहे होते हैं, नित्य पूजा कर रहे होते हैं, भगवान को धूप-दीप अर्पित कर रहे होते हैं। उनके पूजा का स्तर काफी ऊंचा हो जाता है। ऐसे में भगवान उन्हें संकेत देने लगते हैं। जिनको पूजा करते हुए काफी समय हो गया है उनके दीपक में फूल बनने लगता है। ऐसा नहीं है कि पहले उनकी पूजा स्वीकार नहीं होती थी। लेकिन लगातार पूजा करने से ऐसे व्यक्ति के पूजा का स्तर ऊंचा हो जाता है। तब ऐसे व्यक्ति को भगवान संकेत देने लगते हैं।

जब दैवी शक्तियां अपना आशीर्वाद देना शुरू कर देती हैं तो दीपक में फूल बनना शुरू हो जाता है। ऐसा नहीं होता है कि कोई चीज आपकी किस्मत में थी इसलिए मिल गई। कहीं न कई दैवी शक्तियों आशीर्वाद ही होता है कि आपके सारे काम बनने लगते हैं। आपकी किस्मत अचानक बदलने लगती है। अगर आप पूजा करते हैं, अपने भगवान, ईष्टदेव से जुड़े होते हैं तो आपको संकेत मिलने लगते हैं। इन्हीं संकेतों में एक संकेत है दीपक में फूल बनना।

2. दूसरे व्यक्ति वो होते हैं जिनको पूजा-पाठ करते-करते काफी समय हो गया है और उन्हें पूजा-पाठ से लाभ भी मिलता है। ऐसा नहीं है कि पहले लाभ नहीं मिलता था लेकिन जब आपने अपने ईष्टदेव का मंत्र जप करना शुरू किया। नित्य पूजा में मंत्रजाप करना शुरू कर दिया तो दीपक में भी फूल के माध्यम से आपको संकेत मिलने लगता है। जो व्यक्ति इस तरह से मंत्रों का जप करने लगे तो उन्हें भी ऐसे संकेत मिलने लगते हैं।

हमारा शरीर जो पांच तत्वों से बना है, वो धीरे-धीरे पूजा करने से बैलेंस होने लगता है। इन्हीं पांच तत्वों में एक तत्व अग्नि का होता है। आपकी पूजा जब स्वीकार होती है तो अग्नि तत्व के माध्यम से आपको पता चलता है। अग्नि को माँ लक्ष्मी से भी जोड़कर देखा जाता है। इसलिए जब आपके दीये में फूल बनने लगता है तो आपके जीवन में धनलाभ के कई रास्ते भी खुलने लगते हैं। इसका साफ संकेत होता है कि भगवान आपकी पूजा को स्वीकार कर रहे हैं।

दीये में फूल बनने का मतलब
दीये में फूल बनने का मतलब

3. तीसरे व्यक्ति वो होते हैं जो पिछले जन्म से काफी तपस्या की होती है। पिछले जन्म में उन्होंने भगवान की खूब सेवा की होती है। ऐसे व्यक्ति का तप पिछले जन्मों से इस जन्म में आता है। पूजा से अर्जित तप कभी नष्ट नहीं होता है। अगर आप तपोबल एकत्रित करते हैं तो वो तपोबल कभी नष्ट नहीं होता है। तपोबल आपके अंदर ही रहता है। जब आप किसी मंत्र को जपना शुरू कर देते हैं तो उस मंत्र की ऊर्जा धीरे-धीरे आपके अंदर समाहित होने लगती है।

जब वही ऊर्जा बहुत अधिक मात्रा में आपके अंदर समाहित हो जाती है, परिपक्व हो जाती है। तब मंत्र सिद्धि की ओर बढ़ने लगता है। ऐसे समय में आप जिस भी मंत्र का जाप कर रहे होते हैं, उसकी एक तरह से आंशिक सिद्धि आपके मिल गई होती है। ऐसे व्यक्ति जो पिछले जन्म में भी पूजा-पाठ से जुड़े थे या मंत्र जप कर रहे थे या साधनाओं से जुड़े थे तो उनका तपोबल बढ़ता रहता है और ऐसे व्यक्तियों के दीपक में फूल बनने लगता है।

जब हमारे दीपक में फूल बनता है या जो नित्य पूजा का दीपक आप लगा रहे हैं, उनमें जब फूल बनता है तो वो अग्नि तत्व को रिप्रजेंट करता है और अग्नि तत्व जो होता है वो कैश फ्लो की डायरेक्शन होती है। मतलब आपका जो कैश फ्लो है वो बढ़ने लगता है। दीये में फूल बनना इस बात का संकेत होता है कि माँ लक्ष्मी की कृपा आपके ऊपर होने लगी है।

4. चौथे व्यक्ति वो होते हैं जो पूजा-पाठ तो काफी समय से कर रहे होते हैं लेकिन उन्हें कभी कोई संकेत नहीं मिलता है। लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने जीवन में किसी चीज का त्याग किया हो तो उनके दीये में भी फूल बनने लगता है। जैसे मान लीजिए कि आपको नॉनवेज पसंद था। आप मांस-मदिरा का सेवन खूब करते थे और ईश्वर की पूजा भी करते थे।

लेकिन जब आपके पूजा के दौरान ही नॉनवेज और मदिरापान को बंद कर दिया या हमेशा के लिए उसका त्याग कर दिया तो भी आपके दीये में फूल बनने लगता है। क्योंकि क्या होता है, जब कोई शक्ति की हम आराधना करते हैं तो शक्तियां उस समय बहुत अधिक प्रसन्न हो जाती हैं जब आप किसी चीज का त्याग पूजा के लिए करते हैं। भगवान के लिए कुछ छोड़ देते हैं।

ऐसे में दैवीय शक्तियां उससे बहुत प्रसन्न होती हैं। इस बात को आप महसूस करेंगे कि आपने जब मांस-मदिरा का त्याग किया है, आपके जीवन में बहुत कुछ अच्छा होने लगा है। कुछ लोग अंडा भी खा लेते हैं और कहते हैं कि यह नॉनवेज नहीं होता। ऐसा कुछ नहीं है, अंडा भी नॉनवेज ही होता है।

5. पांचवे व्यक्ति वो होते हैं जिनका हृदय बहुत कोमल होता है। उनका हृदय इतना कोमल होता है कि एक चींटी भी गलती से पैर के नीचे आ जाए तो उन्हें बहुत दुख होता है। जिन्हें प्रकृति से प्यार होता है। जो दूसरों के दुख को समझते हैं। जिनके आंखों में जल्द ही आंसू आ जाते हैं, जो जल्दी भावुक हो जाते हैं। जिनके अंदर भावनाएं बहुत होती है। ऐसे लोगों के दीपक में भी फूल बनता है।

ऐसे लोग जब पूजा-पाठ करते हैं। भगवान को नित्य दीपदान देते हैं तो उनके दीपक में फूल बनने लगता है। दैवीय शक्तियाँ आपके मन को पढ़ती हैं। अगर आप सिर्फ पूजा करते वक्त अच्छे हैं और दिनचर्या में बुरे हैं। हर वक्त किसी न किसी की बुराई करते रहते हैं तो दैवीय शक्तियाँ आपसे नाराज हो जाती हैं। दैवीय शक्तियाँ सुक्ष्म रूप में हमेशा आपके साथ रहती हैं।