Deepak Mein Phool: दीये में फूल बनकर गायब होने का क्या संकेत होता है?

दीये में फूल बनककर गायब होने का मतलब है कि आपकी मनोकामना पूरी होने वाली है। यह संकेत इस बात का होता है कि आप जिस विधि से भगवान को पूजते हैं, जिस विधि से भगवान की पूजा करते हैं, जिस भाव से भगवान की पूजा करते हैं, भगवान आपकी पूजा स्वीकार कर रहे हैं।

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दीये का फूल गायब होना

सभी के मन में कई बार एक सवाल आता है कि दीये में फूल बनकर गायब होने का क्या संकेत होता है? यदि आपके दीये में भी फूल बनकर गायब हो जाता है तो इसको कई लोग समझते हैं कि भगवान ने उनकी मनोकामना सुन ली है और भगवान उनकी मनोकामना को पूर्ण भी कर रहे हैं। लेकिन बता दें कि आपको ऐसा नहीं समझना चाहिए। दीये में फूल बनना इस बात का संकेत होता है कि भगवान ने आपकी पूजा को स्वीकार किया है।

दीये में फूल बनककर गायब होने का मतलब है कि आपकी मनोकामना पूरी होने वाली है। यह संकेत इस बात का होता है कि आप जिस विधि से भगवान को पूजते हैं, जिस विधि से भगवान की पूजा करते हैं, जिस भाव से भगवान की पूजा करते हैं, भगवान आपकी पूजा स्वीकार कर रहे हैं। जहां तक दीये में फूल बनकर गायब होने की बात है तो यह कोई विशेष महत्व नहीं रखता है। महत्त्व सिर्फ इस बात का है कि आपकी पूजा को भगवान स्वीकार कर रहे हैं और दीये में फूल बनना उसी बात का संकेत है।

दीये में फूल बनकर गायब होने का मतलब

इसे समझने के लिए, मान लीजिये कि आप तपस्या कर रहे हैं और तपस्या करते करते आपको भगवान ने दर्शन दे दिए। अब दर्शन के बाद भगवान ने आपकी इच्छा के अनुसार आशीर्वाद देकर गायब हो गए। ऐसे में क्या आप सवाल करेंगे कि भगवान गायब क्यों हो गए? यहां भगवान का अंतर्ध्यान होना ज्यादा महत्व नहीं रखता है। भगवान ने आपको दर्शन दिए और आपकी मनोकामना को पूर्ण किया, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए दीये में फूल बनकर गायब होना भी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि आपके दीपक में फूल बना है।

इस दुनिया में जो भी चीज बनी है उसका अंत अवश्य होता है। इसलिए दीपक में फूल बनकर गायब होना एक सामान्य घटना है। ऐसा होने पर ईश्वर के रुष्ट होने या प्रसन्न ना होने का कोई मतलब नहीं होता है। आपकी दीपक ने फूल बनना ही इस बात का संकेत है कि ईश्वर ने आपकी पूजा को स्वीकार किया है। इसलिए यदि आपके दीपक में फूल बनकर गायब हो जाता है तो अपने मन में किसी भी प्रकार की शंका ना करें। ईश्वर का आशीर्वाद आप के ऊपर बना है और हमेशा आपके ऊपर उनका आशीर्वाद बना रहेगा। आप बस इतना का ध्यान रखें कि रोज ईश्वर की पूजा करें और उनकी प्रतिमा के सामने सुबह-शाम दीप अवश्य जलाएँ।

ईश्वर की पूजा में सबसे बड़ी महत्वपूर्ण बात यह होती है कि भगवान ने आपकी पूजा को स्वीकार किया है और फूल के माध्यम से आपको संकेत दिया है कि आपकी पूजा को उन्होंने स्वीकार किया है। आपकी हर पूजा उन तक पहुंच रही है। आपको इन सब बातों पर ध्यान नहीं देना है बल्कि आपको पूजा पर सिर्फ ध्यान लगाना है। यहां एक बात का ध्यान अवश्य रखें कि जो भी दीपक जलाएं तो सच्चे मन से दीपक के सामने पूजा के दौरान मंत्र जाप में अवश्य करें।

दीपक ने फूल बनकर गायब होना किसी भी प्रकार की अनिष्ट होने की या भगवान का आपसे नाराज होने का संकेत नहीं होता है। इसलिए केवल इस बात पर ध्यान दें कि आपकी पूजा सही तरीके से हो रही है कि नहीं। एक दिन दीये में फूल बना है और दूसरे दिन नहीं, इस बात को लेकर मन में ना सोचें। अपने मन में बस इस बात का ख्याल रखें कि आपको जीवन में जो लक्ष्य हासिल करना है, वह आप प्राप्त कर सकते हैं और इसमें भगवान आपकी मदद कर रहे हैं।

पूजा के साथ साथ आप इस बात का भी ध्यान रखें कि हमेशा अपने जीवन में अच्छे कर्म करें। किसी दूसरे व्यक्ति का दिल ना दुखाएं। इसके साथ-साथ ना ही किसी पर मिथ्या आरोप लगाएं। आपको सिर्फ कर्म करना है। फल की चिंता आप ना करें, इसे ईश्वर पर ही छोड़ दें। इस बात का ध्यान हमेशा रखें कि अपना कर्म करते रहें। जीवन में कर्म के बिना कुछ भी हासिल नहीं होता है। ईश्वर भी उन्हीं लोगों की मदद करता है जो अपने जीवन में कर्म को ध्यान में रखते हुए अपना कार्य करते हैं। ऐसे लोगों को ईश्वर की कृपा से जीवन में सफलता अवश्य मिलती है।

पूजा के समय इस बात का भी ध्यान रखें कि आप जहां पर पूजा कर रहे हैं और जहां पर आप का मंदिर है, वह सही दिशा में होना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपके घर में जहां कहीं भी मंदिर हो, नॉर्थ-ईस्ट दिशा में होनी चाहिए। नॉर्थ ईस्ट दिशा घर कि वह दिशा होती है जहां उत्तर और पूर्व दोनों आपस में आकर मिलते हैं। उत्तर और पूर्व दिशा जिस जगह पर मिलते हैं उसे ही ईशान कोण कहा जाता है।

ईशान कोण में मंदिर इसलिए भी होना चाहिए क्योंकि वास्तु के हिसाब से, वास्तु पुरुष का दिमाग होता है। ईशान कोण में दिमाग तेजी से कार्य करता है और दिमाग में बहुत जल्दी अध्यात्म आता है। इससे यह फायदा होता है कि आपका दिमाग ईश्वर में अच्छे से ध्यान लगा पाता है। ईश्वर की कृपा और उन्हीं को प्राप्त होती है जो दूसरों का दिल नहीं दुखाते हैं। ऐसे लोग हमेशा इस बात का ध्यान रखते हैं कि किसी भी वजह से भूलवश भी उनसे किसी का दिल ना दुखे।

बहुत सारे लोग ऐसे लोग होते हैं जो मंत्रजाप नहीं करते हैं। पूजा करते समय मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। मंत्र का जाप आप अपने मन में गिनकर कर सकते हैं। यदि आप ऐसा नहीं कर पाते हैं तो आप किसी पूजा की दुकान से एक रुद्राक्ष की माला खरीद कर ले आएं और उसी से मंत्र का जाप करें। पूजा के समय हर रोज कम से कम 11 बार मंत्र जाप अवश्य करें। मंत्र जाप करने से भगवान और अन्य जो भी दैवीय शक्तियां होती हैं, वह धीरे-धीरे आपकी तपस्या से प्रसन्न होती हैं और आपको मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।

पूजा के समय मंत्र जाप करने से मन की शुद्धि होती है और पूजा में व्यक्ति का मन भी लगा रहता है। जैसे-जैसे आप अपनी पूजा पद्धति को गहरा करते रहते हैं और हमेशा मंत्रों का जाप करते हैं, तब भगवान आप की ओर खींचे चले आते हैं। इसके साथ-साथ मंत्र जाप करने से आपके अंदर आध्यात्मिक शक्ति का भी विकास होता है। आपका आत्मबल भी बढ़ता है। ईश्वर की पूजा के साथ-साथ अपने घर के कुलदेवी या कुलदेवता का भी पूजन अवश्य करना चाहिए।

घर के कुलदेवी या कुलदेवता यदि आपसे नाराज हैं, तो आपके जीवन में कई परेशानियां आने लगती हैं। इसलिए अपने घर की कुलदेवी, कुलदेवता को भी अवश्य पूजना चाहिए। कुलदेवता, इष्टदेव प्रसन्न होने से जीवन में तरक्की कमाल खुलता है और हर काम आसानी से होने लगती है। कुलदेवता अपना आशीर्वाद आपके ऊपर बनाए रखते हैं। जो लोग अपने घर में ऐसा नहीं करते हैं, उनसे उनके कुलदेवता नाराज हो जाते हैं और उनके जीवन में कई प्रकार की परेशानियां होने लगती है। एक बात का ध्यान रखें कि ईश्वर विश्वास के भूखे होते हैं और साथ ही वह व्यक्ति का मन भी देखते हैं। इसलिए ईश्वर की पूजा सच्चे मन और हृदय से करनी चाहिए।