पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं, जानें ऐसे समय में आपको क्या करना चाहिए?

पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं, आज हमलोग इस बारे में जानेंगे। बता दें कि पीरियड होने के बाद लड़कियों और महिलाओं को किसी भी शुभ कार्य में सम्मलित होने से मना किया जाता है।

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पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं
पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं

पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं, आज हमलोग इस बारे में जानेंगे। बता दें कि पीरियड होने के बाद लड़कियों और महिलाओं को किसी भी शुभ कार्य में सम्मलित होने से मना किया जाता है। ऐसे में कई लड़कियों के मन में यह सवाल होता है कि पीरियड में गुरुवार का व्रत कर सकते हैं या नहीं?

पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं?

गुरुवार का व्रत करने से भक्तों को भगवान विष्णु और देव गुरु बृहस्पति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने वाले लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। उनके वैवाहिक जीवन की सभी समस्याएं खत्म हो जाती है। 

गुरुवार व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?

यदि आप गुरुवार का व्रत करते हैं तो आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस दिन भूलकर भी कुछ गलतियों को नहीं करना चाहिए। यदि आप व्रत के दौरान कोई गलती करते हैं तो आपको इससे नुकसान झेलना पड़ सकता है। 

माना जाता है कि गुरुवार को व्रत के दौरान व्यक्ति को बाल-दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए। यदि आप ऐसी गलती करते हैं तो आपको आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा गुरुवार के दिन घर भी नहीं धोना चाहिए और ना ही घर में पोछा लगाना चाहिए। 

पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं

गुरुवार के दिन यदि लड़कियों को पीरियड शुरू हो जाता है तो उन्हें यह व्रत नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार मासिक धर्म शुरू होने के बाद लड़कियों का शरीर अशुद्ध हो जाता है। इस दौरान यदि आप व्रत करते हैं तो आपको व्रत का फल प्राप्त नहीं होता है। व्रत के दौरान हमेशा शरीर स्वच्छ रहना चाहिए।

इसको लेकर कई पुजारियों का मानना है कि व्रत के दौरान यदि पीरियड आता है तो ऐसी स्थिति में व्रत रख सकते हैं लेकिन पूजा नहीं कर सकते। ऐसे में यह व्रत में नहीं गिना जाएगा। ऐसी स्थिति में आप किसी अन्य व्यक्ति से पूजा करवा सकती हैं।

पीरियड के दौरान किस तरह करें पूजा

  • व्रत के दौरान यदि पीरियड शुरू हो गया है तो ऐसे में महिलाओं को अपना व्रत पूरा करना चाहिए।
  • इस दौरान महिलाओं को भगवान की आराधना मानसिक रूप से करना चाहिए।
  • व्रत के बाद पूजा-पाठ किसी अन्य व्यक्ति से करवाया जा सकता है। 
  • इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि पूजा के दौरान महिलाओं को पूजा में नहीं बैठना चाहिए। उन्हें दूर से ही पूजा में भाग लेना चाहिए।
  • पीरियड के दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ का सामान नहीं छूना चाहिए। ऐसा करने से पूजा का सामान अशुद्ध हो जाता है। इस दौरान महिलाएं मंत्रों का जाप अपने मन में कर सकती हैं।

पीरियड आने के पांचवें दिन बाल धोकर और नहाकर पूजा में शामिल हुआ जा सकता है। कुछ महिलाओं का पीरियड 7 दिनों तक चलता है, इसलिए उन्हें पीरियड के बाद ही पूजा-पाठ में शामिल होना चाहिए।