सुबह-सुबह शीशा देखने से क्या होता है? क्यों नहीं देखना चाहिए टूटा शीशा?

शीशा देखने से पहले या शीशे में अपना चेहरा देखने से पहले सुबह उठते ही सबसे पहले अपना मुंह धोना चाहिए। ऐसा करने से चेहरे पर मौजूद नेगेटिव एनर्जी दूर हो जाती है।

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सुबह-सुबह शीशा देखना
सुबह-सुबह शीशा देखना शुभ या अशुभ

सुबह-सुबह शीशा देखने से क्या होता है? इस प्रकार का सवाल आपके मन में जरूर आता होगा। टूटा हुआ शीशा देखना वैसे भी अच्छा नहींं माना जाता है। सुबह के समय में जब हमलोग उठते हैं तो हमारी शरीर नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव में रहता है। ऐसे में सुबह-सुबह शीशा देखना आपको महंगा पड़ सकता है। कहा जाता है कि सुबह उठते ही शीशा में अपना चेहरा नहीं देखना चाहिए। यह अच्छा नहीं माना जाता है।

माना जाता है कि अगर आपका सुबह अच्छा से गुजरा तो पूरे दिनभर आप समय अच्छे से गुजरेगा। इसलिए सभी व्यक्ति इस बात की कोशिश करता है कि उसका दिन अच्छे से गुजरे। इसके लिए लोग कई प्रकार की सावधानियां भी बरतते हैं। ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि वह सुबह उठते ही शीशा देखने लगते हैं। लेकिन यह आपको बर्बाद कर सकता है।

सुबह-सुबह शीशा देखने से क्या होता है?

सुबह-सुबह शीशा देखना अच्छा नहीं माना जाता है। यदि आपकी आदत भी ऐसी है तो यह एक बुरी आदत है। सुबह-सुबह शीशा देखने से जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है। रात में सोने के बाद हमारा शरीर नकारात्मक उर्जा के प्रभाव में होता है। ऐसे में सुबह उठते ही शीशा देखने से जीवन में इसका नकारात्मक प्रभाव दिखता है।

सुबह सुबह शीशा देखने से दिनभर हमारा मन और शरीर नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव में रहता है। यदि आपकी आदत भी ऐसी है तो यह आदत बदल दें। यह एक गलत आदत है। रोजाना सुबह उठते ही शीशा देखने से आपके जीवन में नेगेटिविटी आ सकती है।

चेहरे पर होता है नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव

वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम लोग सुबह सुबह-उठते हैं तो हमारा चेहरा और शरीर दोनों ही नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव में रहता है। जब उठते ही हमलोग शीशा देखते हैं तो यह नकारात्मक ऊर्जा शीशे से रिफ्लेक्ट होकर वापस हमारे चेहरे पर पड़ता है। इससे हमारा शरीर नकारात्मक उर्जा के प्रभाव में आ जाता है। हमारी आंखों के जरिए नेगेटिव एनर्जी शरीर के अंदर प्रवेश करती है। इसलिए सुबह उठने के बाद हमेशा अपना मुंह धोकर शीशा देखना चाहिए।

टूटा शीशा क्यों नहीं देखना चाहिए?

सुबह-सुबह शीशा देखने के अलावा टूटा शीशा देखना भी अपशकुन माना जाता है। शीशा टूटने के बाद उसमें वास्तु दोष आ जाता है। इसलिए जब हम लोग रोज टूटे हुए शीशे को देखते हैं तो जीवन में कई प्रकार की परेशानियां आने लगती है। वास्तु शास्त्र में टूटा शीशा घर में रखना और उसमें रोज अपना चेहरा देखना दुर्भाग्य का सूचक माना जाता है।

माना जाता है कि यदि आपके घर में टूटा कांच या शीशा रखा हुआ है तो उसे जितना जल्दी हो सके घर से बाहर निकाल दें। घर में टूटा हुआ शीशा रहने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। लगातार ऐसा होने से घर में रहने वाले सदस्यों पर इसका बुरा असर होता है। व्यक्ति के जीवन में तरक्की के मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं। पूरे घर में नेगेटिव एनर्जी का वातावरण बन जाता है।

सुबह उठते ही क्या करना चाहिए?

शीशा देखने से पहले या शीशे में अपना चेहरा देखने से पहले सुबह उठते ही सबसे पहले अपना मुंह धोना चाहिए। ऐसा करने से चेहरे पर मौजूद नेगेटिव एनर्जी दूर हो जाती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, व्यक्ति को हमेशा ब्रह्म मुहूर्त में ही उठना चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त में जो व्यक्ति रोज जग जाता है, उनके जीवन से नकारात्मक एनर्जी का प्रभाव दूर होने लगता है।

ब्रह्म मुहूर्त में उठने के बाद सूर्योदय से पहले नित्य क्रिया के बाद, स्नान आदि करने के बाद ईश्वर का ध्यान लगाना चाहिए। रोज सुबह और शाम घर के मंदिर में दीपक जलाना चाहिए। ब्रह्म मुहूर्त में उठने के बाद ईश्वर की आराधना करने से जीवन में सकारात्मकता का प्रभाव बढ़ता है। जीवन में तरक्की के मार्ग खुलते हैं। इसके अलावा पूरा दिन मन में पॉजिटिव ख्याल आते रहते हैं।